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गोबर से हरित क्रांति: “हरित होली” ने संतकुमारी को बनाया आत्मनिर्भर ‘लखपति दीदी’

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कटनी –  कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशानुसार एवं जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मिशन के माध्यम से महिलाओं को उनकी रुचि, क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहयोग प्रदान कर आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।इसी प्रयास का सशक्त उदाहरण हैं जनपद पंचायत कटनी के ग्राम मतवारी (ग्राम पंचायत देवरीटोला) की संतकुमारी विश्वकर्मा, जिन्होंने संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायक सफर तय किया है।

संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक

समूह से जुड़ने से पहले संतकुमारी की मासिक आय मात्र 6 से 6.5 हजार रुपये थी। खेती ही आय का मुख्य साधन था, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन कम होता था। आकस्मिक जरूरतों के लिए साहूकारों से ऊँची ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था, जिससे आर्थिक दबाव बना रहता था।परिस्थितियाँ तब बदलीं जब संतकुमारी ने 13 महिलाओं को साथ लेकर “जय स्व-सहायता समूह” का गठन किया और उसकी अध्यक्ष बनीं। सभी सदस्यों ने प्रति सप्ताह 10 रुपये की नियमित बचत शुरू की।प्रथम सीसीएल के माध्यम से समूह को 30 हजार रुपये प्राप्त हुए, जिससे उन्नत कृषि यंत्र और आधुनिक उपकरण खरीदे गए। मिशन द्वारा प्रदान किए गए कृषि प्रशिक्षण से उन्नत तकनीकों को अपनाया गया और खेती में उल्लेखनीय सुधार हुआ। समय पर ऋण चुकाने के बाद द्वितीय बैंक लिंकेज से 40 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई, जिससे अतिरिक्त कृषि संसाधन जोड़े गए। परिणामस्वरूप उत्पादन बढ़ा और आय में निरंतर वृद्धि हुई।आज संतकुमारी की मासिक आय 14 से 20 हजार रुपये तक पहुँच चुकी है—जो आत्मनिर्भरता की मजबूत पहचान है।होलिकोत्सव पर “हरित पहलआगामी होली पर्व को ध्यान में रखते हुए संतकुमारी और उनका समूह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई पहल कर रहा है। समूह द्वारा गोबर से निर्मित सामग्री में उपले,पूजा माला,गुलरी एवं अन्य पूजन सामग्री शामिल है। ये सभी उत्पाद पूर्णतः प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल हैं।इन उत्पादों का विक्रय जनपद, जिला एवं राज्य स्तर के त्यौहारी मेलों में किया जाएगा। इससे दोहरा लाभ होगा।इससे समूह की आय में वृद्धि होगी। प्रदूषण में कमी और “हरित होली” का संदेश संतकुमारी कहती हैं, “त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का अवसर भी है।”बनीं प्रेरणा का स्रोतसंतकुमारी की सफलता से प्रेरित होकर ग्राम की अन्य महिलाएँ भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ रही हैं। मिशन टीम द्वारा ग्राम भ्रमण के दौरान उनकी पहल की सराहना की गई।जिला परियोजना प्रबंधक शबाना बेगम ने कहा कि मिशन का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। संतकुमारी और उनका समूह इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उनका लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाना है।

सामूहिक प्रयास से बदलती तस्वीर

संतकुमारी विश्वकर्मा की कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, सामूहिक प्रयास और आत्मविश्वास के साथ ग्रामीण महिलाएँ न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।“जय स्व-सहायता समूह” की यह पहल दर्शाती है कि जब महिला शक्ति संगठित होती है, तो वह विकास की नई इबारत लिखती है—जहाँ हरित उत्सव भी है और बढ़ती आमदनी भी।


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