कटनी – अगर इरादे मजबूत हों और सरकार की नीतियों का साथ मिल जाए, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि उन्नति का द्वार बन जाती है। ऐसी ही कहानी है कटनी जिले की बरही तहसील के ग्राम कनौर के रहने वाले प्रगतिशील युवा किसान रवि साहू की।
मुख्यमंत्री खुद बैठे रवि के ट्रैक्टर पर
हाल ही में बरही तहसील में आयोजित ‘किसान सम्मेलन’ में कृषि विभाग द्वारा लगाई प्रदर्शनी में युवा किसान रवि साहू ने अपने ट्रैक्टर को नरवाई से बैल की आकृति में सजाया था, जो लोगों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र रहा। प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस ट्रैक्टर से आकर्षित होकर यहां पहुंचे और खुद ट्रैक्टर में बैठकर रवि से बातचीत किया। जिस पर रवि साहू ने बताया कि वे कस्टम हायरिंग पर लोगों को ट्रैक्टर उपलब्ध कराते हैं। मुख्यमंत्री का एक सामान्य युवा के ट्रैक्टर पर इस तरह बैठना रवि के लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। प्रफुल्लित और उत्साहित रवि कहते हैं कि “यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान था। मुख्यमंत्री जी का मेरे ट्रैक्टर पर बैठना इस बात का प्रमाण है कि यदि युवा मेहनत करें, तो सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।”
‘कस्टम हायरिंग केंद्र‘ ने बदली किस्मत
रवि साहू की यह सफलता रातों-रात नहीं आई। उन्होंने कृषि अभियांत्रिकी विभाग की ‘कस्टम हायरिंग योजना’ का लाभ उठाया। रवि ने बैंक ऋण के माध्यम से 21 लाख 69 हजार 272 रुपये की लागत से अपना केंद्र स्थापित किया। इस बड़ी राशि के निवेश में शासन की ओर से उन्हें 9 लाख 60 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे उनकी वित्तीय राह आसान हो गई।
वर्तमान में रवि के पास ट्रैक्टर, स्मार्ट सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल, मल्टीक्रॉप थ्रेशर, स्ट्रॉ रीपर, रिवर्सिबल पलाऊ, हैरो, रोटावेटर और स्वचालित रीपर जैसे 9 प्रमुख कृषि यंत्र उपलब्ध हैं। ये मशीनें न केवल रवि की आय का जरिया बनी हैं, बल्कि क्षेत्र के उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी वरदान साबित हो रही हैं जो खुद ऐसी महंगी मशीनें नहीं खरीद सकते।
तकनीक से समय और श्रम की हो रही बचत
रवि का मानना है कि आधुनिक खेती केवल पसीने का काम नहीं, बल्कि सही तकनीक का समन्वय है। उनके केंद्र से किफायती दरों पर मशीनें किराए पर लेकर गांव के किसान अब कम समय में अधिक पैदावार ले रहे हैं। रवि गर्व से कहते हैं कि “मैं प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी का आभारी हूँ, जिनकी नीतियों ने मुझे एक नौकरी ढूंढने वाले युवा से एक सफल ‘कृषि उद्यमी’ बना दिया।”
कृषि अभियांत्रिकी विभाग की सहायक यंत्री कृति पाण्डेय के अनुसार, 18 से 40 वर्ष के ग्रामीण युवाओं के लिए यह योजना खुद का मालिक बनने का सुनहरा अवसर है। योजनांतर्गत एक ग्राम और एक परिवार में केवल एक ही केंद्र स्थापित किया जा सकता है। इच्छुक युवा आधार कार्ड, हाई स्कूल अंकसूची, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, और मूल बैंक ड्राफ्ट लेकर योजना का लाभ ले सकते हैं।










