Home इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. यादव वनों की समृद्धि और जैव विविधता के प्रति संवेदनशील...

मुख्यमंत्री डॉ. यादव वनों की समृद्धि और जैव विविधता के प्रति संवेदनशील मुख्यमंत्री ने अपने जन्म दिवस पर भी इस प्रतिबद्धता को दोहराया

22
0

कटनी  –  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के वन और जल स्त्रोतों को समृद्ध बनाकर वन्य प्राणियों तथा जंगली जीवों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। जन्म दिवस वाले दिन कछुओं को विमुक्त कर उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के प्रति अपनी संवेदनशीलता प्रकट की। उल्लेखनीय है कि जल संरचनाओं को स्वच्छ बनाए रखने और जलीय जैव विविधता के संतुलन में यह कछुएं महत्वपूर्ण भूमिका हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्म दिवस पर सागर जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त किया। इस दिन चीतों के पुनर्वास के लिए बनने वाले विशेष बाड़े का पूजन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रकृति और वन्य जीवों की सेवा को ही ईश्वर की सेवा के समान माना है। उनका मानना है कि वन्य और जलीय जीव, जैव विविधता के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही इनकी उपस्थिति से वनों और जल संरचनाओं के संरक्षण में भी मदद मिली है तथा प्रदेश के पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलता है। यह गतिविधियां रोजगार सृजन का माध्यम बनती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस दृष्टिकोण का परिणाम है कि अपने जन्मदिवस पर भी उन्होंने प्रदेश के वन विकास और जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए गतिविधियां संचालित कीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि नदियां प्रदेश के वन केवल राज्य ही नहीं, अपितु राष्ट्र की महत्वपूर्ण धरोहर हैं, क्योंकि प्रदेश के वन देश की कई प्रमुख नदियों के उद्गम क्षेत्र हैं। इस दृष्टि से हमारे वनों से निकली नदियां कई राज्यों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। वनों की सुरक्षा केवल पर्यावरणीय दायित्व ही नहीं है अपितु यह हमारी सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सामुदायिक सहभागिता से वनों के प्रबंधन पर विशेष बल देते हैं। इसके दृष्टिगत प्रधानमंत्री श्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत@2047 के लक्ष्य की पूर्ति में प्रदेश की ओर से हरसंभव योगदान देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विजन@2047 री-इमेजिनिंग फॉरेस्ट रिसोर्सेस फॉर द क्लाइमेट रेसिलियंट फ्यूचर नामक डॉक्यूमेंट का गति‍दिवस विमोचन किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वन प्रबंधन में बदलते वर्षा पैटर्न, बढ़ते तापमान, भूमि उद्योग के दबाव के दृष्टिगत पारिस्थितिकी आधारित, जलवायु अनुकूल, विज्ञान आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया जा रहा है। प्रदेश में वन आश्रित समुदायों को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं अपितु वन संसाधनों के सहप्रबंधक और संरक्षक के रूप में देखा जा रहा है। व्यवस्थाएं इस आधार पर विकसित की जा रही हैं कि जब समुदायों को वनों से प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा तो वे वनों के सर्वाधिक सशक्त संरक्षक बनेंगे। यह विचार समावेशी विकास को बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में वनों के प्रबंधन में डिजिटल प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता, कार्यकुशलता और जवाबदेही पूर्ण व्यवस्था को भी सशक्त किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वनों के प्रति इस संवेदनशीलता के परिणामस्वरूप राज्य सरकार वनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ उत्पादक और सम-सामयिक दृष्टि से उपयोगी संसाधनों के स्त्रोत के रूप में सौंपना चाहती हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण, वन संरक्षण के साथ ही सामुदायिक वानिकी और आजीविका, पर्यावरण, पर्यटन और प्रकृति शिक्षा, कार्बन एवं पारिस्थितिकीय तंत्र, वन भूमि के बाहर हरित आच्छादन बढ़ाने की दिशा में वैज्ञानिक रणनीति से गतिविधियां संचालित की जा रही है।


Google search engine

Google search engine

Google search engine

Google search engine




Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here