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कलेक्टर श्री तिवारी ने कन्हवारा के प्रगतिशील कृषक लालजी मौर्य के खेत का किया निरीक्षण आधुनिक तकनीक और फसल विविधीकरण से किसान ने खेती को बनाया लाभकारी व्यवसाय 12 एकड़ में मिश्रित खेती, तीनों सीजन में विविध फसलों के उत्पादन के साथ पशुपालन से भी कर रहे अतिरिक्त आय अर्जित

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कटनी  – खेती में आधुनिक तकनीकों के प्रयोग, फसल विविधीकरण और पशुपालन को अपनाकर ग्राम कन्हवारा के प्रगतिशील कृषक श्री लालजी मौर्य ने कृषि को लाभकारी व्यवसाय का रूप दिया है। श्री मौर्य अपने दो छोटे भाइयों के साथ मिलकर लगभग 12 एकड़ भूमि में मिश्रित एवं बहुफसली खेती कर रहे हैं। फसल उत्पादन के साथ पशुपालन और आम के पौधों से भी उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने श्री मौर्य के खेत पहुंचकर विभिन्न फसलों का अवलोकन किया तथा कृषक से कृषि कार्यों, फसल उत्पादन और अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों की जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर ने कृषक को पशुपालन विभाग की डेयरी प्लस योजना की जानकारी देते हुए योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई, कतार पद्धति को बढ़ावा

प्रगतिशील कृषक श्री लालजी मौर्य कृषि कार्यों में नवीन तकनीकों का प्रयोग कर रहे हैं। उनके द्वारा धान की खेती में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) पद्धति अपनाई जा रही है। इसके साथ ही विभिन्न सब्जियों, उद्यानिकी एवं अनाज की फसलों में कतार पद्धति सहित आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। गन्ना और अदरक जैसी फसलों का उत्पादन भी उनके कृषि मॉडल का हिस्सा है।

खरीफ में 9 एकड़ धान सहित अरहर, गन्ना, अदरक और कद्दू की खेती

वर्तमान खरीफ सीजन 2026-27 में श्री मौर्य द्वारा लगभग 9 एकड़ में धान, 1 एकड़ में अरहर, आधे एकड़ में गन्ना, आधे एकड़ में अदरक तथा आधे एकड़ में कद्दू की खेती की जा रही है। इसके अलावा लगभग आधे एकड़ भूमि में आम के पौधे लगाए गए हैं, जिनसे भविष्य में अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

खरीफ, रबी और जायद—तीनों सीजन में विविध फसलों का उत्पादन

श्री मौर्य वर्षभर कृषि गतिविधियों से जुड़े रहते हैं। खरीफ सीजन में धान के साथ उड़द, अरहर और विभिन्न सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। रबी सीजन में गेहूं के साथ चना, मसूर, मिर्च और गोभी जैसी फसलें ली जाती हैं। वहीं जायद सीजन में उड़द एवं मूंग के साथ ककड़ी, कलिंदर और खरबूजा जैसी फसलों का उत्पादन किया जाता है। इस प्रकार फसल विविधीकरण के माध्यम से वे वर्षभर खेत से आय प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

कृषि के साथ पशुपालन, चार भैंसों से दुग्ध उत्पादन

कृषक श्री लालजी मौर्य ने बताया कि उन्होंने कृषि के साथ पशुपालन को भी अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। उनके पास उन्नत नस्ल की गायों के साथ चार भैंसें हैं, जिनसे दुग्ध उत्पादन किया जा रहा है। कृषि एवं पशुपालन के समन्वित मॉडल से उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत प्राप्त हो रहा है।

तीनों सीजन में 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा

श्री मौर्य के अनुसार विभिन्न फसलों के उत्पादन, पशुपालन और अन्य कृषि गतिविधियों से तीनों सीजन को मिलाकर लगभग 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा अर्जित किया जा रहा है। आधुनिक कृषि तकनीक, फसल विविधीकरण और कृषि के साथ पशुपालन उनकी सफलता के प्रमुख आधार हैं।

बीमारी, कीट एवं खरपतवार की समस्या पर वैज्ञानिक सलाह लेने की सलाह

कलेक्टर श्री तिवारी ने कृषक को कहा कि फसलों में बीमारी, कीट या खरपतवार की समस्या आने पर कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर उचित वैज्ञानिक उपचार एवं प्रबंधन अपनायें। उन्होंने कृषकों को आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ-साथ वैज्ञानिक सलाह को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

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