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स्कूल-कॉलेजों में चलेगा सड़क सुरक्षा और नशा-मुक्ति जागरूकता अभियान सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में कलेक्‍टर ने दिये निर्देश हेलमेट और यातायात नियमों के पालन के साथ नशे से दूर रहने की दी जाएगी समझाइश

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जबलपुर,
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और विद्यार्थियों को नशे की गतिविधियों से दूर रखने के लिए जिले के
स्कूल-कॉलेजों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। मंगलवार को कलेक्टर सभागार में
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा को लेकर सम्बंधित विभागों की बैठक हुई। बैठक में
पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय, अतिरिक्‍त कलेक्‍टर नीता राठौर एवं रविशंकर राय, जिला पंचायत
सीईओ अभिषेक गहलोत, यातायात, परिवहन, शिक्षा व स्वास्थ्य सहित संबंधित विभागों के अधिकारी
मौजूद रहे।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक
करना जरूरी है। खासतौर पर दोपहिया वाहन चलाने वाले विद्यार्थियों को हेलमेट पहनने और यातायात
नियमों का पालन करने के लिए लगातार समझाइश दी जाए। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों में सड़क
सुरक्षा से जुड़ी शॉर्ट फिल्म और वीडियो दिखाए जाएं। उन्‍होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के तहत
भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विद्यार्थियों से
अपने साथियों और परिवार के सदस्यों को भी हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करने को कहा जाएगा।

स्कूलों के आसपास नशे की बिक्री पर नजर

बैठक में स्कूलों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री और अन्य गतिविधियों पर निगरानी रखने के
निर्देश दिए गए। कलेक्टर श्री सिंह ने बैठक में मौजूद स्‍कूल एवं कॉलेजों के प्राचार्यों से कहा कि
शैक्षणिक संस्‍थाओं के आस-पास नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधि की जानकारी मिलती है तो तत्काल
संबंधित अधिकारियों को सूचना दी जाए। स्कूलों के आसपास पान, गुटखा और अन्य नशीले पदार्थ बेचने
वाली टपरियों पर भी नजर रखी जाए। संबंधित विभागों के समन्वय से कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्‍टर श्री सिंह ने एमपीआरडीसी के अधिकारीयों से कहा कि जीतने भी ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए
थे, वहां स्पीड कण्ट्रोल करने के लिए रम्बल स्ट्रिप लगाएं, साथ ही कहा कि जहां आवश्‍यकता हो वहां
सीमेंट के ब्रेकर भी बना सकते है। उन्‍होंने कहा कि जबलपुर पाटन रोड पर पर्याप्त ब्रेकर बनाए ताकि
दुर्घटना पर कण्ट्रोल किया जा सके।

कार्रवाई से पहले बच्चे की परिस्थिति समझें : पुलिस अधीक्षक

पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने बैठक में कहा कि विद्यार्थियों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के
लिए शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन का सक्रिय सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के खिलाफ
कार्रवाई से पहले उसकी परिस्थितियों और समस्याओं को समझना चाहिए। उद्देश्य बच्चे को पकड़ना,
डांटना या दंडित करना नहीं, बल्कि उसे नशे की आदत से बाहर निकालना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी पारिवारिक या अन्य परिस्थितियों के कारण दोपहिया वाहन से स्कूल आते
हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर लगातार समझाइश देने के साथ
नोटिस और अन्य औपचारिक प्रक्रिया भी अपनाई जाए, ताकि इसकी जानकारी अभिभावकों तक पहुंच
सके। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को पत्र भी जारी किया जाएगा।
9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों पर विशेष नजर

पुलिस अधीक्षक श्री उपाध्याय ने कहा कि नशे से जुड़ी गतिविधियों की शुरुआत स्कूल स्तर पर ही रोकने
की जरूरत है। विशेष रूप से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों पर ध्यान दिया जाए। इस उम्र में
गलत संगत और नशे जैसी आदतों का प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों के व्यवहार
में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय के लिए एक मॉडल तैयार कर जानकारी दी जाएगी। किसी विद्यार्थी
में नशे से जुड़ी समस्या दिखाई देने पर पहले उसे समझाने और काउंसलिंग का प्रयास किया जाए। स्कूल
में उपलब्ध काउंसलर, सीएससी और अन्य संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है। ऐसे शिक्षकों की
मदद भी ली जाए, जिनके साथ विद्यार्थी सहज होकर अपनी समस्याएं साझा करते हैं।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया जाए। नशे के मामलों
में यह पता लगाना जरूरी है कि नशीला पदार्थ विद्यार्थी तक कहां से और किस माध्यम से पहुंच रहा है।
इसके साथ ही बच्चे को नशे की आदत से बाहर निकालने के प्रयास किए जाएं।
बैठक में अधिकारियों को बैठक में रोड सेफ्टी से संबंधित शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें दुर्घटनाओं
से बचाव, हेलमेट के उपयोग और यातायात नियमों के पालन का संदेश दिया गया।
जनवरी से अगस्त 2026 तक दुर्घटना

बैठक में बताया गया कि इसी वर्ष जनवरी से अगस्त तक बड़े छोटे वाहन से 1423 दुर्घटना जिले में हुई
है, इसमें से 179 व्यक्तियों कि मृत्यु हुई है। मृतकों में 90 व्यक्ति ऐसे थे जिनके पास हेलमेट नहीं था।

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