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कलेक्टर की प्रेरणा बनी संबल, जगपति के खेतों में उग रही खुशहाली 25 डिसमिल से शुरू हुआ नवाचार का सफर, अब 2.5 एकड़ में चिया की खेती और पांच एकड़ तक विस्तार की तैयारी

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कटनी  – खेती की छोटी-सी जमीन पर बोया गया नवाचार का बीज आज जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र के दियागढ़ गांव के किसान जगपति के लिए नई उम्मीद बन रहा है। कभी 25 डिसमिल खेत में चिया और अश्वगंधा की खेती का प्रयोग करने वाले जगपति अब परंपरागत खेती से आगे बढ़कर औषधीय एवं वैकल्पिक फसलों की राह पर चल पड़े हैं। उनकी इस नई पहल को कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के प्रोत्साहन से संबल मिला।पिछले वर्ष जब कलेक्टर श्री तिवारी जगपति के खेत पहुंचे, तब चिया और अश्वगंधा की फसल उनके नवाचार की गवाही दे रही थी। लागत और आमदनी की जानकारी लेते हुए कलेक्टर ने किसान के इस प्रयोग को करीब से जाना। जगपति ने बताया कि चिया की खेती में महज 2,200 रुपये खर्च हुए। उत्पादन के बाद 2 क्विंटल चिया 18 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से संगमबीडी एफपीओ को बेची। अश्वगंधा से भी 34 किलो बीज और 50 किलो जड़ प्राप्त हुई।इस अनुभव ने जगपति का भरोसा बढ़ाया। अब 2.5 एकड़ में चिया की खेती कर रहे जगपति इसे करीब पांच एकड़ तक विस्तार देने की तैयारी में हैं। एक एकड़ में किनोवा और 50 डिसमिल में इसबगोल लगाने की योजना भी है। अपनी दो एकड़ जमीन के साथ ठेके पर खेत लेकर वे खेती की नई संभावनाएं तलाश रहे हैं।नाबार्ड की आदिवासी विकास परियोजना से मिल रहा बीज एवं तकनीकी सहयोग और मानव जीवन विकास समिति की स्थानीय कार्यकर्ता अदिति वैष्णव का मार्गदर्शन इस सफर को मजबूती दे रहा है।

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