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खाद वितरण में पारदर्शिता के लिए ई-विकास प्रणाली लागू किसान भाई अब घर बैठे बुक कर सकेंगे ई-टोकन

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कटनी   किसानों की सुविधा के लिए उर्वरक वितरण ई-विकास प्रणाली लागू की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को खाद (उर्वरक) प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना होगा और मोबाईल व कियोस्क सेंटर के माध्यम से वे अपना ई-टोकन प्राप्त कर सकेंगे।ई-विकास प्रणाली में ई-टोकन प्राप्त करने हेतु किसान ई-विकास प्रणाली पोर्टल etoken.mpkrishi.org पर अपने आधार नंबर और मोबाइल ओटीपी के माध्यम से लॉगिन कर पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीयन होते ही पोर्टल में स्वतः ही ‘AgriStack’ के माध्यम से किसान की भूमि की जानकारी प्रदर्शित हो जायेगी। कृषकों को प्रदर्शित भूमि की जानकारी के अनुसार खसरा अनुसार बोई गई फसलों की जानकारी स्वयं ही दर्ज करनी होगी। भूमि के रकबे एवं दर्ज की गई फसल की जानकारी के आधार पर पोर्टल स्वतः ही वैज्ञानिक अनुशंसा अनुसार उर्वरक की गणना कर किसान को आवश्यक कुल उर्वरक की मात्रा प्रदर्शित हो जायेगी। प्रदर्शित उर्वरक की मात्रा अनुसार किसान अपनी सुविधा अनुसार नजदीकी खाद विक्रय केंद्र (जिला विपणन केन्द्र, मार्केटिंग सोसाइटी, सहकारी समितियों, एमपी एग्रो या निजी विक्रेता) का चयन कर डिजिटल ई-टोकन जनरेट कर सकेंगे। किसान यह भी चयन करेगेंगे कि वे सहकारी समिति के सदस्य है कि नहीं। यदि वे सहकारी समिति के सदस्य है तो वे सहकारी समितियों का विकल्प चयन कर ई-टोकन प्राप्त कर सकेगें। जबकि, सहकारी समिति के सदस्य न होने की दशा में नहीं का चयन कर अन्य नगद उर्वरक विक्रेताओं (जिला विपणन केन्द्र, मार्केटिंग सोसाइटी, एमपी एग्रो या निजी विक्रेता) का चयन कर ई-टोकन जनरेट कर सकेगें।ई-टोकन जनरेट होने के बाद किसान को निर्धारित तिथि से 3 दिन (अवकाश दिवसों को छोड़कर) के भीतर खाद उठाना अनिवार्य है। 3 दिन उपरांत खाद न लेने पर ई-टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा एवं किसान पुनः ई-टोकन जनरेट कर खाद प्राप्त कर सकेगें। पात्रता अनुसार एक किसान एक माह में अधिकतम 50 बोरी उर्वरक प्राप्त कर सकता है। दोबारा खाद की आवश्यकता होने पर 30 दिन के अंतराल के बाद ही अगला टोकन बुक किया जा सकेगा। जिन किसानों (ट्रस्ट, पट्टा या सिकमी एवं अन्य) पंजीकरण करने के बाद भी भूमि की जानकारी का डेटा पोर्टल पर नहीं दिख रहा है, वे कृषक पोर्टल पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से अपनी खसरा अनुसार जानकारी दर्ज करेगें। इसका सत्यापन संबंधित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) द्वारा किया जावेगा। तत्पश्चात कृषक अपना टोकन जनरेट कर सकेगें। उपसंचालक कृषि ने बताया कि ई-विकास प्रणाली से खाद की कालाबाजारी और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त होगी। रीयल-टाइम डेटा के माध्यम से उर्वरक की मांग और आपूर्ति पर सटीक नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर विदिशा, जबलपुर और नर्मदापुरम जैसे जिलों में इसके सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं। जहाँ हजारों किसानों को बिना किसी असुविधा के खाद उपलब्ध कराई गई है। ई-विकास प्रणाली के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक किसान तक समय पर और पारदर्शी तरीके से उर्वरक पहुंचाना सुनिश्चित किया जायेगा।


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