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“नन्हा-मुन्ना राही हूं… लेकिन मौत के साए में पढ़ने को मजबूर कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी पर प्रशासन की खामोशी सवालों में

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कैमोर देश के भविष्य कहे जाने वाले मासूम बच्चों के लिए जहां सुरक्षित माहौल, स्वच्छता और बेहतर शिक्षा की बातें की जाती हैं, वहीं कैमोर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी की हकीकत इन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है??? यहां छोटे-छोटे बच्चे ऐसे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं, जिसे देखकर किसी भी अभिभावक का दिल दहल जाए।
“नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…” जैसे प्रेरणादायक गीत बच्चों को देश का भविष्य बनने की सीख देते हैं, लेकिन जब वही बच्चे टूटती दीवारों, टपकती छत और गंदगी के बीच बैठकर पढ़ने को मजबूर हों, तो यह गीत भी आज की सच्चाई से पर कटाक्ष जैसा लगता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आंगनवाड़ी पुराने उप मुख्य स्वास्थ्य केंद्र भवन में संचालित हो रही है, जिसकी हालत बेहद खराब है। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं, छत से पानी टपकता है और चारों तरफ गंदगी व दुर्गंध का माहौल बना रहता है। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी हालात से वाकिफ होकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस केंद्र के आसपास अक्सर आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। कई बार नगर परिषद के सफाई कर्मचारी भी यहीं कचरे का ढेर लगा देते हैं, जिससे संक्रमण और बीमारी का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे माहौल में बच्चों को स्वच्छता और स्वास्थ्य का पाठ पढ़ाना अपने आप में एक विडंबना बन चुका है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं होने से अनियमितताएं लगातार बढ़ रही हैं। कई बार समाजसेवी संस्थाओं ने इस केंद्र की स्थिति सुधारने का प्रयास किया, लेकिन वह भी स्थायी समाधान नहीं बन सका। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इस आंगनवाड़ी की एक और गंभीर सच्चाई यह है कि यहां हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी होता है। महिलाएं अपनी सुरक्षा को जोखिम में डालकर इस जर्जर भवन में आने को मजबूर हैं। यदि किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा यह सवाल अब जनता खुलकर पूछ रही है।
एकीकृत बाल विकास परियोजना वि.गढ़ के अंतर्गत संचालित इस आंगनवाड़ी केंद्र को लेकर वार्ड क्रमांक-6 के नागरिक लगातार नए भवन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सुरक्षित भवन नहीं मिलेगा, तब तक बच्चों और महिलाओं की जान खतरे में बनी रहेगी।
मुख्य बाजार के बीच स्थित होने के बावजूद इस केंद्र की दुर्दशा प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयां करती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन किसी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?? यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में बदल सकती है।
जनता अब उम्मीद कर रही है कि जिम्मेदार अधिकारी जल्द संज्ञान लेकर नए भवन की व्यवस्था करेंगे, ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल मिल सके। आखिर देश का भविष्य कहे जाने वाले इन नौनीहालों को डर और गंदगी के साए में पढ़ने के लिए कब तक मजबूर रहना पड़ेगा यह सवाल अब हर किसी की जुबान पर है।


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