फरवरी – फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष (नरवाई/पराली) को जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से मिट्टी में मिलाकर या भूसा बनाकर उपयोग करने की अपील कृषि विभाग द्वारा की जा रही है। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की लागत में भी कमी आती है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नरवाई को खेत में ही सड़ाने अथवा स्ट्रा रीपर मशीन से भूसा निकालकर पशु आहार में उपयोग करने से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, जिससे भूमि अधिक उपजाऊ बनती है। फसल अवशेषों में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश जैसे पोषक तत्व जमीन में मिल जाने से रासायनिक खादों पर निर्भरता घटती है। वहीं अवशेषों की परत से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
नरवाई प्रबंधन के प्रमुख फायदे
मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि,पोषक तत्वों की बचत,मिट्टी की नमी का संरक्षण,वायु प्रदूषण व जहरीली गैसों पर रोक,मित्र कीटों एवं सूक्ष्म जीवों की सुरक्षा, सिंचाई व खाद की लागत में कमी आती है।
हैप्पी सीडर से सीधी बुवाई
हैप्पी सीडर के माध्यम से कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद खेत में पड़ी नरवाई को हटाए या जलाए बिना सीधे बुवाई की जा सकती है। इसमें लगी घूमने वाली लोहे की पट्टियां बोनी की कतार के सामने की नरवाई काटकर बिछा देती हैं और जीरो टिलेज तकनीक से बीज डाल देती हैं। इससे फसल बढ़ने के साथ नरवाई स्वतः विघटित होकर मिट्टी में मिल जाती है।
सुपर सीडर की विशेषता
सुपर सीडर एक आधुनिक कृषि यंत्र है, जो ट्रैक्टर से संचालित होता है और एक ही बार में जुताई, बुवाई एवं खाद डालने का कार्य करता है। यह पराली को काटकर मिट्टी में मिलाते हुए बुवाई करता है, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और पराली जलाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
अनुदान एवं आवेदन प्रक्रिया
कृषक http://farmermpdage.org पोर्टल पर एमपी ऑनलाइन केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद अधिकृत विक्रेता सूची से 7 दिन के भीतर यंत्र का चयन करना होगा। भुगतान डीडी/आरटीजीएस/एनईएफटी अथवा ऑनलाइन माध्यम से मान्य होगा।
आवश्यक दस्तावेज
आधार कार्ड,भूमि खतौनी (बी-1),पासपोर्ट साइज फोटो,मोबाइल नंबर,ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन कार्ड,जाति प्रमाण पत्र (एससी हेतु), और बैंक पासबुक आवश्यक है।
यंत्रों की अनुमानित कीमत एवं अनुदान
हैप्पी सीडर: कीमत 1.70 से 2.00 लाख रुपये — अनुदान लगभग 85 हजार रुपये है। जबकि सुपर सीडर की कीमत 2.60 से 3.00 लाख रुपये और अनुदान लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई न जलाकर आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाएं, जिससे मिट्टी, पर्यावरण और भविष्य तीनों सुरक्षित रह सकें।








