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स्टोन पिकर से बदली खेती की तस्वीर: पत्थरमुक्त खेतों से बढ़ेगी उपज, घटेगा खर्च कटनी

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कटनी   कृषि क्षेत्र में आधुनिक यंत्रों के उपयोग से किसानों की मेहनत कम होने के साथ-साथ उत्पादन में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। इसी कड़ी में स्टोन पिकर एक ऐसा उपयोगी कृषि यंत्र है, जो खेत की ऊपरी सतह अथवा 5 से 15 सेंटीमीटर गहराई तक मौजूद पत्थरों, ईंट के टुकड़ों एवं कठोर अवशेषों को निकालने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रहा है।यह यंत्र ट्रैक्टर की पीटीओ से संचालित होता है। इसमें लगी खुदाई ब्लेड मिट्टी के भीतर जाकर पत्थरों को बाहर निकालती है, जिन्हें कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से छानकर ऊपर उठाया जाता है। बाद में ये पत्थर स्टोन कलेक्शन बॉक्स में एकत्र हो जाते हैं, जिन्हें आवश्यकता अनुसार खाली किया जाता है। इस प्रक्रिया से खेत समतल, सुरक्षित और फसल बोने योग्य बन जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार खेत में पत्थर बने रहने से मिट्टी के प्राकृतिक छिद्र भर जाते हैं, जिससे हवा और पानी का संचार बाधित होता है। परिणामस्वरूप मिट्टी कठोर हो जाती है और सूक्ष्म जीवों की सक्रियता घट जाती है। साथ ही पौधों की जड़ों को फैलने में कठिनाई होती है, पानी धारण की क्षमता कम हो जाती है और फसल की वृद्धि प्रभावित होती है।इतना ही नहीं, पत्थरों की मौजूदगी से कृषि यंत्रों को भी भारी नुकसान होता है। रोटावेटर, रीपर, कम्बाइन हार्वेस्टर सहित अन्य उपकरणों की ब्लेड और टाइन टूटने की आशंका बनी रहती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त मरम्मत खर्च उठाना पड़ता है।वहीं दूसरी ओर, स्टोन पिकर से खेत पत्थरमुक्त होने पर कई लाभ सामने आते हैं। फसल की उपज बढ़ती है, कृषि यंत्रों की उम्र लंबी होती है, मजदूरी व रखरखाव का खर्च घटता है और समय की भी बचत होती है। बीज बोने से लेकर कटाई तक की प्रक्रिया आसान हो जाती है, जिससे कुल मिलाकर किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त होता है।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इस आधुनिक यंत्र को अपनाएं, तो खेती अधिक वैज्ञानिक, सुरक्षित और लाभकारी बन सकती है।


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