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कृषि मेला एवं श्रीअन्न फूड फेस्टिवल :- श्रीअन्न के लजीज व्यंजनों ने बढाया आकर्षण. किसानों को दी गई पराली प्रबंधन से लेकर प्राकृतिक खेती तक और लघुधान्य फसलों की जानकारी. वैज्ञानिकों ने दिए खेती को लाभ का धंधा और सेहत को मजबूत बनाने के गुरुमंत्र.

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जबलपुर,
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा कृषि वर्ष-2026 के अंतर्गत पुलिस लाइन स्थित हॉकी ग्राउंड में आयोजित किया जा रहा तीन दिवसीय कृषि मेला एवं श्रीअन्न फूड फेस्टिवल ने आज दूसरे दिन गुरुवार को भी किसानों एवं नागरिकों को पारंपरिक व्यंजनों, जैविक उत्पादों और आधुनिक कृषि यंत्रों के अनूठे संसार से परिचित कराया। दूसरे दिन न केवल खेती-किसानी की नई तकनीकों का प्रदर्शन हुआ, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक शहरी जनता के लिए श्रीअन्न के स्वादिष्ट व्यंजनों ने भी खूब वाहवाही
बटोरी। पातालकोट की दुर्लभ रसोई और जनजातीय स्वाद मेले का सबसे बड़ा आकर्षण रहा। यहाँ आगंतुकों ने शुद्ध, प्राकृतिक और कम मसालों में तैयार उन व्यंजनों का स्वाद चखा। आर्या ऑर्गेनिक्स की कोदो-कुटकी से निर्मित कुकीज ने पोषण के साथ-साथ पैकेट बंद उत्पादों का एक स्वस्थ विकल्प पेश किया। वहीं, मधुरम स्वीट्स ने ज्वार, बाजरा और कोदों के मेल से तैयार विशेष कुकीज प्रदर्शित की, जो मधुमेह और
फिटनेस प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। मिठास के शौकीनों के लिए श्री रघुवीर कृपा का स्टॉल किसी आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। यहाँ बिना
किसी रासायनिक मिलावट के तैयार किया गया जैविक गुड़ और खेतों से सीधे लाए गए ताजे गन्ने का रस परोसा जा रहा था। लोगों ने गन्ने के रस की ताजगी और गुड़ की शुद्धता की जमकर सराहना की। अचना गोविंद प्राकृतिक कृषि फार्म ने यह साबित कर दिया कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों से को भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। उनके स्टॉल पर उपलब्ध प्राकृतिक उत्पादों से बने वैफल्स, होल- व्हीट ग्रिल्ड सैंडविच तथा जैविक आलू से बनी कुरकुरी आलू टिक्की इन व्यंजनों ने युवाओं और बच्चों को विशेष रूप से प्रभावित किया। खाद्य स्टॉल्स के साथ-साथ मेले का तकनीकी पक्ष भी काफी मजबूत रहा। विभिन्न कंपनियों द्वारा प्रदर्शित आधुनिक कृषि यंत्रों ने किसानों का ध्यान खींचा। उन्नत ट्रैक्टर, बुआई की नई मशीनें और ड्रोन आधारित छिड़काव यंत्रों के प्रदर्शन ने आधुनिक कृषि की एक नई तस्वीर पेश की। कृषि मेले के दूसरे दिन की गतिविधियों की शुरुआत किसान संगोष्ठी से हुई किसानों को संबोधित करते
हुए कृषि अभियांत्रिकी के एन एल मेहरा ने पराली प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे मिट्टी के मित्र कीट और पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने आधुनिक यंत्रों जैसे हैप्पी सीडर और डीकंपोजर के उपयोग की सलाह दी ताकि फसल अवशेषों को खाद में बदला जा सके। श्री वासु शुक्ला ने उनके द्वारा एयरोपोनिक्स विधि से की जा रही आलू की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अमित झा ने लघुधान्य फसलों की पोषण क्षमता और कम पानी में इनके उत्पादन से अवगत कराया। विशेषज्ञ एस पी तिवारी ने कांगनी, रागी और कोदों की खेती की तकनीक साझा की। उन्होंने बताया कि ये फसलें न केवल जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशील हैं, बल्कि बाजार में इनकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है। श्री गालव ने प्राकृतिक खेती पर जोर दिया। उन्होंने जीवामृत और बीजामृत के प्रयोग को समझाते हुए
कहा कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर की गई खेती ही भविष्य में मानव स्वास्थ्य और भूमि की सेहत को बचा सकती है।


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