कटनी – जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से निरंतर संवाद और सार्थक प्रयासों की वजह से वर्तमान में खरीफ फसलों के लिए सर्वाधिक मांग वाली नीम कोटेड यूरिया की एक रैक झुकेही रैक प्वाइंट पर आ गई है। इससे जिले को 740 मीट्रिक टन यूरिया मिलेगी।उपसंचालक कृषि श्री खेलावन डेहेरिया ने बताया कि रैक से आई खाद में से बहोरीबंद डबल लॉक केन्द्र के लिए 60 मीट्रिक टन, स्लीमनाबाद डबल लॉक केन्द्र के लिए 90 मीट्रिक टन, मझगवां बड़वारा डबल लॉक केन्द्र के लिए 60 मीट्रिक टन तथा बरही डबल लॉक केन्द्र के लिए 90 मीट्रिक टन यूरिया उर्वरक आवंटित की गई है। जबकि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक कटनी को 170 मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित की गई है।इसी प्रकार सीएमएस कटनी, सीएमएस उमरियापन ढीमरखेड़ा, सीएमएस रीठी, सीएमएस बड़वारा, सीएमएस बाकल, सीएमएस स्लीमनाबाद व सीएमएस ढ़ीमरखेड़ा को 30-30 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की गई है। इसके अलावा एमपी एग्रो कटनी को कुल 60 मीट्रिक टन खाद आवंटित की गई है। जिससे यहां के किसानों को पर्याप्त मात्रा में उनकी जरूरत के मुताबिक उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।प्रदेश में उर्वरक वितरण व्यवस्था को और अधिक सुगम एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से 30 जुलाई से हाइब्रिड मोड लागू कर दिया है। पूर्व में ई-विकास प्रणाली के माध्यम से संचालित उर्वरक वितरण व्यवस्था में आंशिक संशोधन करते हुए शासन के निर्देशानुसार यह नई व्यवस्था लागू की गई है। अब उर्वरक विक्रेताओं को 30 जुलाई तक ई-विकास प्रणाली से वितरित उर्वरक का संपूर्ण अभिलेख सुरक्षित रखना होगा। वहीं, 30 जुलाई से आगामी आदेश तक किसानों को उर्वरक विक्रय के दौरान विक्रेताओं को किसान के आधार कार्ड की छायाप्रति, मोबाइल नंबर तथा कंपनीवार वितरित उर्वरक (यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी, एमओपी आदि) की मात्रा का निर्धारित प्रारूप में रिकॉर्ड संधारित करना अनिवार्य होगा।उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत विक्रय की गई उर्वरक की जानकारी बाद में पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। साथ ही पैक्स, विपणन संघ के डबल लॉक केंद्र, एम पी एग्रो के विक्रय केंद्र एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं को निर्धारित रजिस्टर में सभी आवश्यक विवरण संधारित करने के निर्देश दिए गए हैं।जिले के समस्त कृषकों से अपील की गई है कि वे अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए केवल संतुलित उर्वरकों का ही उपयोग करें। अनावश्यक खाद का प्रयोग न केवल लागत बढ़ाता है, बल्कि भूमि की उर्वरक शक्ति को भी नुकसान पहुँचाता है।


