Home इंदौर बजरंग जैव संसाधन केंद्र बना ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की नई मिसाल ...

बजरंग जैव संसाधन केंद्र बना ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की नई मिसाल प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग से किसानों को मिली जैविक खाद-दवाइयां तो महिलाओं को मिला स्थानीय रोजगार का अवसर

34
0

कटनी – जिले के बड़वारा विकासखंड के ग्राम पंचायत पठरा स्थित बजरंग गौशाला में संचालित बजरंग जैव संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में सामुदायिक पहल के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। केंद्र द्वारा स्‍थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए छोटे एवं सीमांत किसानों को जैविक कृषि से जोड़ते हुये उन्हें उचित मूल्य पर जैविक खाद एवं जैविक दवाईयां उपलब्ध कराई जा रहीं है।

जैविक खाद और दवाइयों के लिए स्थानीय मंच

उपसंचालक कृषि श्री खेलावन डे‍हरिया ने बताया कि बजरंग जैव संसाधन केंद्र (बीआरसी) द्वारा जैविक खाद एवं जैविक दवाइयों के उत्पादन और बाजार के बीच की दूरी को कम करने के लिए किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से जैविक खाद और दवाइयां तैयार करने, उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं भंडारण की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है। केंद्र के माध्यम से तैयार जैव उत्पादों को किसानों तक उचित मूल्य पर पहुंचाने के साथ-साथ इनके प्रचार-प्रसार एवं बिक्री के लिए भी मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और उत्पादन को बाजार की मांग से जोड़ने में मदद मिल रही है।

कृषि विभाग और मानव जीवन विकास समिति का सहयोग

बजरंग जैव संसाधन केंद्र का संचालन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कटनी तथा मानव जीवन विकास समिति के सामूहिक तत्वावधान में किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है, जबकि मानव जीवन विकास समिति केंद्र के संचालन, तकनीकी सहयोग एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रही है।

250 किसान सीधे जुड़े, 65 किसानों ने लिया लाभ

उपसंचालक कृषि श्री डेहरिया ने बताया कि केंद्र में फसल की आवश्यकता और मौसम के अनुसार 16 प्रकार की जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशक तैयार कर उपलब्ध कराए जाते हैं। किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार यहां से जैविक खाद एवं दवाइयां प्राप्त कर रहे हैं। कृषि विभाग के सहयोग से संचालित (एनएमएनएफ) योजना के अंतर्गत पठरा एवं रोहनिया के दो क्लस्टरों के करीब 250 किसान इस केंद्र से जुड़े हुए हैं। वर्तमान मौसम में अब तक 65 किसान बीआरसी से जैविक खाद एवं दवाइयां प्राप्त कर चुके हैं और अन्य किसानों को भी जैविक उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

महिलाओं की भागीदारी से बढ़ी आजीविका

बीआरसी केंद्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसमें महिलाओं की सक्रिय सहभागिता है। समूह की महिलाओं द्वारा केंद्र में जैविक खाद एवं दवाइयों का निर्माण किया जा रहा है। इससे एक ओर महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर तैयार हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों को गांव के नजदीक ही जरूरत के अनुसार जैविक कृषि सामग्री उपलब्ध हो रही है।

स्थानीय संसाधनों से स्थानीय उद्यम तक

बीआरसी केंद्र यह दर्शाता है कि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों को सामूहिक प्रयास, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क से जोड़कर ग्रामीण समुदाय के लिए आय एवं आजीविका का प्रभावी साधन बनाया जा सकता है। केंद्र के माध्यम से किसानों को अपने गांव में ही जैविक खाद एवं दवाइयां उपलब्ध होने से समय और लागत दोनों में लाभ मिल रहा है।

भविष्य में व्यापक किसान-आधारित केंद्र बनाने की दिशा

उपसंचालक कृषि श्री डेहरिया ने बताया कि भविष्य में बीआरसी को केवल 250 किसानों तक सीमित न रखते हुए एक व्यापक किसान-आधारित व्यावसायिक एवं विपणन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में संभावनाएं हैं। इसके माध्यम से किसानों को उत्पाद विकास, गुणवत्ता मानक, प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग जैसी सुविधाओं से जोड़ा जा सकता है। इस पहल के विस्तार से अधिक किसानों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग मिलने के साथ उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार प्रतिस्पर्धा में सुधार की संभावना है। साथ ही किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने और स्थानीय उत्पादों को बड़े एवं डिजिटल बाजारों से जोड़ने में BRC महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here