कटनी – जिले के किसानों की फार्मर आईडी बनाने का अभियान शुरू है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर शासकीय दल स्वयं किसानों के पास जाकर उनकी फार्मर आईडी बनवा रहे हैं। जिले में अब तक 2 लाख 37 हजार से अधिक किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। कलेक्टर ने जिले के सभी किसानों से अपनी फार्मर आईडी बनवाने की अपील की है।कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों को फार्मर आईडी निर्माण कार्य में और अधिक तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।यह आईडी किसानों के लिए एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान के रूप में काम करती है। फार्मर आईडी, भूमि अभिलेखों, पशुधन स्वामित्व, बोई गई फसल,खाद प्राप्त करने और प्राप्त लाभ सहित विभिन्न किसान-संबंधित डेटा से जुड़ी होती है।जिले में अब तक कुल 2 लाख 37 हजार 132 किसानों की फार्मर आई-डी बनाई जा चुकी है ।जिसमे बड़वारा तहसील में 23 हजार 696 फार्मर आई डी बनाई गयी है। इसी प्रकार बहोरीबंद में 33 हजार 28, बरही में 23 हजार 879, ढ़ीमरखेड़ा में 35 हजार 405, कटनी शहरी में 14 हजार 220, कटनी मुड़वारा में 16 हजार 996,रीठी में 30 हजार 449, स्लीमनाबाद में 22 हजार 843,विजयराघवगढ में 39 हजार 153 फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है।शासन के निर्देशानुसार किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रॉस्ट्रक्चर का ग्राम और किसान स्तर तक लगतार विस्तार किया जा रहा है। इसके अंर्तगत कृषि से संबंधित जानकारियां और सेवाएं समय पर व्यक्तिगत तरीके से और पूर्ण विश्वसनीयता के साथ उपलब्ध कराने के लिए आधार कार्ड के समान ‘किसान आईडी’ की शुरुआत की गई है।
फार्मर आईडी के लाभ
फार्मर आईडी बन जाने से किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ आसानी से मिल सकेगा। फार्मर रजिस्ट्री के बनने से किसानों को खरीदी केन्द्रों में पंजीयन, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा योजना सहित सत्यापन में आसानी होगी।
ऐसे बनवायें फार्मर आईडी
किसान भाई https://mpfr.agristack.gov.in/ का प्रयोग कर फार्मर रजिस्ट्री बना सकते हैं। इसके अलावा गिरदावरी के लिए चिन्हित किए गए स्थानीय युवा, पटवारी एवं सीएससी केन्द्रों में भी फार्मर रजिस्ट्री बनवाई जा सकती है। फार्मर रजिस्ट्री बनाने के लिए राजस्व विभाग द्वारा स्थानीय स्तर पर विशेष पहल की जारी है। सभी किसान पटवारियों से भी संपर्क कर फार्मर आईडी तथा आधार आरओआर का कार्य करवा सकते हैं।जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पाएगी वे आगामी पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त से वंचित हो सकते हैं। फार्मर आईडी के बिना उपार्जन के लिए पंजीयन, फसल बीमा एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।

