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विचाराधीन विशेष प्रकरण में पहचान की गोपनीयता और न्यायालयीन मर्यादा बनाए रखने पर जोर पीड़ित, आश्रित और साक्षियों से संबंधित सामग्री के प्रकाशन में न्यायालयीन अनुमति एवं विधिक प्रावधानों के पालन की अपेक्षा

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कटनी – विशेष न्यायालय में विचाराधीन विशेष प्रकरण क्रमांक 59/2026, राज्य विरुद्ध आकाश लोधी एवं अन्य, थाना कुठला, अपराध क्रमांक 271/2026 के संबंध में मृतक के परिजनों की पहचान, निजता एवं सुरक्षा की दृष्टि से विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता रेखांकित की गई है। प्रकरण भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 238(क), 249(क) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(V) के अंतर्गत विशेष न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।प्रकरण में मृतक के परिजनों की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से  न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया है। आवेदन में विभिन्न समाचार पत्रों, समाचार पोर्टलों, सोशल मीडिया प्लेटफार्म, यू-ट्यूब चैनलों तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल माध्यमों पर प्रकरण से संबंधित तथ्यों के कथित अनधिकृत एवं एकपक्षीय प्रकाशन एवं प्रसारण को लेकर गंभीर आपत्ति व्यक्त की गई है।आवेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में मृतक के परिजन मानसिक, सामाजिक एवं सुरक्षा संबंधी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। प्रकरण से संबंधित सामग्री के माध्यम से उनकी पहचान, निवास अथवा अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक होने से भय एवं असुरक्षा की भावना उत्पन्न होने तथा जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है।

पहचान और संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक न करने की अपेक्षा

मृतक के परिजनों की सुरक्षा एवं निजता को ध्यान में रखते हुए यह अपेक्षा की गई है कि उनकी पहचान किसी भी रूप में सार्वजनिक न हो। उनके निवास, पारिवारिक विवरण तथा अन्य व्यक्तिगत एवं संवेदनशील जानकारी का किसी भी माध्यम से प्रकाशन अथवा प्रसारण न किया जाए। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, यू-ट्यूब चैनल, न्यूज पोर्टल अथवा अन्य डिजिटल प्लेटफार्म पर ऐसी सामग्री से भी बचा जाए, जिससे उनकी पहचान स्थापित हो सके अथवा सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होने की आशंका हो।

विचारण न्यायालय की अनुमति के बिना प्रकाशन से बचने का अभिमत

उपनिदेशक, सहायक निदेशक अभियोजन, कटनी द्वारा भी अभिमत प्रस्तुत किया गया है। इसमें कहा गया है कि विशेष न्यायालय के समक्ष विचाराधीन विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 59/2026 के पीड़ित, आश्रित, साक्षियों, प्रकरण की कार्यवाहियों तथा अन्य अनुषांगिक विषयों से संबंधित कोई भी प्रकाशन विचारण न्यायालय की अनुमति के बिना नहीं किया जाए।अभियोजन विभाग के अभिमत में यह भी उल्लेख किया गया है कि विशेष प्रकरण के संबंध में न्यायालय की अनुमति के बिना किया गया कोई प्रकाशन, परिस्थितियों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार न्यायालय की अवमानना तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत विधि सम्मत नहीं होगा।

सुरक्षा एवं संरक्षण संबंधी प्रावधानों के पालन पर जोर

अभिमत में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए वर्ष 1995 के नियमों के प्रावधानों के अनुसार सुरक्षा एवं संरक्षण संबंधी आवश्यक कार्यवाही किए जाने की आवश्यकता भी बताई गई है। न्यायालय के आदेश के उल्लंघन की स्थिति में उल्लंघन की प्रकृति एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

न्यायालयीन प्रक्रिया की निष्पक्षता और गरिमा बनाए रखना जरूरी

विचाराधीन प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए मृतक के परिजनों की सुरक्षा, सम्मान एवं निजता की रक्षा के साथ न्यायालयीन प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं गरिमा बनाए रखना भी आवश्यक है। प्रकरण से संबंधित तथ्यों के प्रकाशन में अपुष्ट, एकपक्षीय अथवा ऐसी संवेदनशील सामग्री से बचना जरूरी है।प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए समाचार माध्यमों एवं डिजिटल प्लेटफार्मों से अपेक्षा है कि वे न्यायालयीन अनुमति, विधिक प्रावधानों एवं न्यायालयीन मर्यादाओं का पालन करते हुए ही प्रकरण से संबंधित सामग्री का प्रकाशन एवं प्रसारण करें। विशेष रूप से पीड़ित परिवार की पहचान, निवास एवं अन्य संवेदनशील जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि उनकी सुरक्षा एवं सम्मान सुरक्षित रहे और न्यायालयीन प्रक्रिया निष्पक्ष एवं निर्बाध रूप से संचालित हो सके।

 

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