कटनी – विकासखंड बड़वारा के ग्राम कुआँ निवासी 40 वर्षीय प्रतीक्षा शुक्ला ने अपनी मेहनत, शिक्षा और आत्मविश्वास के दम पर आर्थिक संघर्षों को पीछे छोड़ते हुये आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। स्नातक और एलएलबी शिक्षित प्रतीक्षा शुक्ला आज श्री कृष्ण स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष होने के साथ-साथ बैंक सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। साथ ही किराना एवं मनिहारी व्यवसाय का सफल संचालन भी कर रही हैं।
आर्थिक तंगी के बीच परिवार की जिम्मेदारी
प्रतीक्षा शुक्ला के पति श्री दिनेश शुक्ला अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य करते थे, जिससे परिवार की मासिक आय करीब 10 से 12 हजार रुपये थी। परिवार आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा था और कच्चे मकान में जीवनयापन करना पड़ता था। शिक्षा और योग्यता होने के बावजूद प्रतीक्षा के पास स्वयं की आय का कोई साधन नहीं था।
स्व-सहायता समूह ने दिखाई नई राह
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर प्रतीक्षा शुक्ला श्री कृष्ण स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं। उनकी शिक्षा, समझ और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें समूह का अध्यक्ष चुना गया। इसके साथ ही मिशन द्वारा उन्हें बैंक सखी के रूप में भी जिम्मेदारी दी गई। बैंक सखी के रूप में वे ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में सहयोग कर रही हैं। इसके लिए उन्हें 3 हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय प्राप्त होता है।
3.40 लाख रूपये की सहायता से शुरू किया व्यवसाय
समूह से सामुदायिक निवेश निधि के तहत 3 लाख रूपये तथा ग्राम संगठन से 40 हजार रूपये की ऋण राशि लेकर प्रतीक्षा ने अपने घर से ही किराना एवं मनिहारी दुकान शुरू की। उनकी मेहनत और व्यवसायिक समझ से दुकान ने जल्द ही रफ्तार पकड़ ली। आज उनकी दुकान पर प्रतिदिन करीब 3 हजार से 4 हजार रूपये तक की बिक्री हो रही है। व्यवसाय से उन्हें लगभग 20 से 22 हजार रूपये प्रतिमाह की आय प्राप्त हो रही है।
अब परिवार की आय 36 हजार रूपये से अधिक
प्रतीक्षा शुक्ला की स्वयं की मासिक आय करीब 24-25 हजार रूपये है, जिसमें व्यवसाय से 20 से 22 हजार रूपये और बैंक सखी के रूप में 3 हजार रूपये की आय शामिल है। वहीं पति की करीब 12 हजार रूपये मासिक आय को मिलाकर परिवार की संयुक्त मासिक आय 36 हजार रूपये से अधिक हो गई है। प्रतीक्षा ने बैंक से लिए गए 40 हजार रूपये ऋण का भुगतान कर दिया है तथा ग्राम संगठन से प्राप्त राशि का भी नियमित रूप से भुगतान कर रही हैं।
कच्चे मकान से पक्के घर तक का सफर
समूह से जुड़ने और स्वरोजगार शुरू करने के बाद प्रतीक्षा शुक्ला के जीवन में बड़ा बदलाव आया। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद उन्होंने अपना पक्का मकान बनवा लिया। आज वे न केवल स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


