कटनी – शासकीय महाविद्यालय विजयराघवगढ़ में मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने तथा कृषि को लाभ का धंधा बनाने के उद्देश्य से जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार सिंह के मार्गदर्शन में जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री रामसुख दुबे विद्यार्थियों को जीरो बजट फार्मिंग एवं कम लागत वाली कृषि तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को होमां खेती एवं अग्निहोत्र के निर्माण और फसलों में उसके उपयोग की तकनीकी जानकारी दी गई। विशेषज्ञ श्री दुबे ने बताया कि होमां खेती एक प्राचीन कृषि पद्धति है, जो अग्निहोत्र की वैदिक परंपरा पर आधारित है। इसमें अग्निहोत्र से प्राप्त राख का उपयोग मिट्टी एवं फसलों के लिए किया जाता है। इस पद्धति में अग्निहोत्र की राख को बीज उपचार, जैविक खाद तथा कीट प्रबंधन में उपयोग करने की जानकारी दी गई। साथ ही अग्निहोत्र भस्म के भंडारण में उपयोग के बारे में भी बताया गया।
उन्होंने अग्निहोत्र के लिए आवश्यक सामग्री, तांबे अथवा मिट्टी के विशिष्ट आकार के पात्र, गाय के गोबर के कंडे, गाय के घी और बिना टूटे चावलों के उपयोग की प्रक्रिया समझाई। विद्यार्थियों को सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय निर्धारित मंत्रों के साथ अग्निहोत्र करने की विधि की जानकारी भी दी गई।
प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को जीरो बजट फार्मिंग के अंतर्गत कम लागत वाली तकनीकों को अपनाने, जैविक संसाधनों का उपयोग करने तथा खेती की लागत कम करने के उपाय बताए गए।


