कटनी – मिट्टी को आकार देती महिलाओं की उंगलियां, चाक पर घूमती मिट्टी और उससे आकार लेते छोटे-छोटे दीये… इन दीयों में सिर्फ दीपावली की रोशनी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सपने, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प भी झलक रहा है। इस बार दीपावली पर कटनी जिले के हजारों घरों को रोशन करने की तैयारी में जुटी हैं स्व-सहायता समूहों की महिलाएं।
जिले के 112 स्व-सहायता समूहों की महिलाएं मिट्टी के दीये, कलश, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियों सहित विभिन्न पूजन सामग्री तैयार कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग और प्रोत्साहन से महिलाएं अपने हुनर को रोजगार का माध्यम बना रही हैं। सृष्टि, सीता, भोलेनाथ, राधेकृष्णा और ओम स्व-सहायता समूह सहित अन्य समूहों की महिलाएं पारंपरिक कला को सहेजते हुए दीपावली के बाजार के लिए आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं।
इन महिलाओं के लिए दीये बनाना महज एक पारंपरिक काम नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके हाथों से तैयार हर दीया उनकी मेहनत और हुनर की पहचान बन रहा है। आजीविका मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहित कर उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और अतिरिक्त आमदनी मिल सके।
स्थानीय स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को अपनाना केवल खरीदारी नहीं, बल्कि महिला स्वावलंबन, पारंपरिक कला और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल भी है। इस तरह कटनी की महिलाओं के हाथों से तैयार दीये इस बार वोकल फॉर लोकल की भावना को रोशन करेंगे।