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विकसित भारत- रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 (वीबी-ग्राम-जी) में मिलेगा श्रमिकों को रोजगार जिला पंचायत सीईओ श्रीमती कौर ने पत्रकारवार्ता में ‘’विकसित भारत जी राम जी’’ अधिनियम, 2025 की दी जानकारी कृषि के चरम मौसम (बुआई एवं कटाई के सीजन) में एक वर्ष में 60 दिवस कार्य-विराम का प्रावधान

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कटनी   भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय विज़न विकसित भारत- 2047 के परिप्रेक्ष्य में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (वीबी-जी राम जी) लागू  किया गया है। वीबी-जी राम जी अधिनियम-2025 के महत्वपूर्ण प्रावधानों एवं प्रदत्त कानूनी अधिकारों के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता के उद्देश्य से जिला पंचायत सभा कक्ष में पत्रकारवार्ता का आयोजन किया गया।पत्रकारवार्ता में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती हरसिमरनप्रीत कौर ने वीबी जी राम जी अधिनियम-2025 की विशेषताओं की जानकारी से अवगत कराया। इस अवसर पर जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुराग मोदी और मनरेगा के परियोजना अधिकारी श्री ऋषिराज चढार उपस्थित रहें।  जिला पंचायत सीईओ श्रीमती कौर ने बताया कि जिलें में 1 लाख 35 हजार 408 जॉबकार्डधारी परिवार हैं, जिनमें 2 लाख 39 हजाा 890 श्रमिक शामिल है। विकसित भारत-जी रामजी अधिनियम 2025 ग्रामीण परिवारों के लिए सालाना 100 की जगह 125 दिन का गारंटीकृत रोजगार, बेहतर बुनियादी ढांचा, समय पर मजदूरी और पारदर्शिता को मजबूत करता है। ग्राम सभाओं को योजना बनाने में सशक्त बनाया गया है, जिससे टिकाऊ ग्राम बुनियादी ढांचा विकसित होगा। अधिनियम में समय पर भुगतान की गारंटी और देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान है। साथ ही रीयल-टाइम एमआईएस डैशबोर्ड, जीपीएस मॉनिटरिंग और सोशल ऑडिट के जरिए पारदर्शिता बढ़ेगी। इसमें जल सुरक्षा, आजीविका बुनियादी ढांचा, आपदा-सुरक्षा और ग्रामीण कनेक्टिविटी जैसे कार्यों पर भी जोर दिया गया है।सीईओ श्रीमती कौर द्वारा बताया गया कि अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिवस का रोजगार गारंटी प्रदान की गई है। कृषि के चरम मौसम (बुआई एवं कटाई के सीजन) में एक वर्ष में 60 दिवस कार्य-विराम का प्रावधान किया गया है, जिससे कृषि श्रम उपलब्धता सुनिश्चित हो। दैनिक मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक अथवा अधिकतम पंद्रह दिवस के भीतर किया जाना अनिवार्य है। रोजगार सृजन को चार प्राथमिक क्षेत्रों से जोड़ा गया है। जल सुरक्षा संबंधी कार्य में नहरों का निर्माण, चेक डैम, तालाबों का पुनरुद्धार और वनीकरण कार्य किये जायेंगे। मूलभूत ग्रामीण अवसंरचना ग्रामीण सड़कें, ग्राम पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्र और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, आजीविका संबंधी अवसंरचना ग्रामीण हाट, अनाज भंडारण, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए वर्कशेड और डेयरी इंफास्ट्रचर, चरम मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए विशेष कार्य चकवात/बाढ़ आश्य स्थल, तटबंध और जंगल की आग प्रबंधन जैसे कार्य किये जायेंगे।

          सभी परिसंपत्तियों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक में एकीकृत किया जाएगा। ग्राम स्तर पर विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण किया जाएगा। योजना को केंद्रीय क्षेत्र योजना से बदलकर केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया गया है। यदि 15 दिवस में कार्य उपलब्ध न कराया जाए तो राज्य द्वारा बेरोजगारी भत्ता देय होगा। पंचायत राज संस्थाओं को योजना कियान्वयन में प्रमुख भूमिका, जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत कार्य लागत ग्राम पंचायतों द्वारा निष्पादित किया जायेगा। जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं कार्यकम अधिकारी योजना प्रबंधन, भुगतान एवं सामाजिक अंकेक्षण के उत्तरदायी होंगे। सामाजिक अंकेक्षण प्रत्येक छह माह में अनिवार्य किया है। डिजिटल उपस्थिति, आधार-आधारित भुगतान, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी का प्रावधान किया गया है।

          यह अधिनियम ग्रामीण आय वृद्धि, जल संरक्षण, अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, जलवायु लचीलापन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन प्रदान करता है। यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को अवसंरचना-केंद्रित, पारदर्शी एवं उत्तरदायी ढाँचे के अंतर्गत पुनर्संगठित करता है तथा दीर्घकालीन सतत विकास और आजीविका सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


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