जबलपुर,
मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड भोपाल द्वारा कलेक्टर जबलपुर के निर्देशन में ई-दक्ष केंद्र जबलपुर में साइबर डिस्प्यूट रेजोल्यूशन फ्रेमवर्क अंडर द इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। मास्टर ट्रेनर एवं अध्यक्ष तन्वी सोशल सर्विसेज समिति, श्री यशदीप चतुर्वेदी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में न्यायपालिका, जिला अभियोजन, राज्य साइबर पुलिस, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, रानी दुर्गावती
विश्वविद्यालय के विधि विभाग तथा शासकीय बैंकों के कुल 32 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को साइबर अपराधों की रोकथाम, डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण, साइबर विवादों के त्वरित समाधान तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 केअंतर्गत उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न प्रकार के डिजिटल फ्रॉड जैसे इन्वेस्टमेंट स्कैम, डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई एवं इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को अवगत
कराया गया कि वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 3 दिनों के भीतर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना तथा डिजिटल साक्ष्यों जैसे यूटीआर नंबर, स्क्रीनशॉट और बैंक विवरण को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। सत्र में आईटी एक्ट की धारा 46 के तहत गठित अर्ध- न्यायिक मैकेनिज्म की कार्यप्रणाली को रेखांकित किया गया। विशेष सत्र में आईटी एक्ट की धारा 70 के तहत शासकीय ईमेल, डिजिटल सिग्नेचर और कंप्यूटर नेटवर्क को वर्ष 2012 की राज्य शासन की अधिसूचना अनुसारसंरक्षित तंत्र घोषित किए जाने के
प्रावधानों को स्पष्ट किया गया। वहीं धारा 72 के अंतर्गत डिजिटल डेटा की गोपनीयता बनाए रखना
अनिवार्य बताया गया, जिसका उल्लंघन करने पर संस्थाओं के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती
है। अंतिम सत्र में जांच एजेंसियों की भूमिका, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 63(4) के तहत
डिजिटल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता तथा सेवा प्रदाताओं द्वारा समय-सीमा में जानकारी न देने पर आईटी
अधिनियम की धारा 67सी के तहत कानूनी कार्रवाई और जुर्माने के प्रावधानों की जानकारी दी गई।

