कटनी – खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और किसानों को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर की अध्यक्षता में मंगलवार को किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान अपर कलेक्टर श्री नीलांबर मिश्रा और उपसंचालक कृषि श्रीमती प्रतिभा गौर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति और स्वास्थ्य प्रभावित होता है। साथ ही इससे निकलने वाला धुआं पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाता है तथा आसपास के खेतों में आग लगने का खतरा भी पैदा करता है। जिले में फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वाले किसानों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के साथ पर्यावरण क्षतिपूर्ति अर्थदंड भी लगाया जाएगा।
रकबे के अनुसार लगेगा अर्थदंड
दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों पर पराली जलाने की प्रत्येक घटना पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक भूमि वाले किसानों पर 5000 रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड निर्धारित किया गया है।
बिना स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के हार्वेस्टर चलाने पर होगी कार्रवा
फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ रीपर अथवा स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इसके बिना हार्वेस्टर से फसल कटाई करने पर हार्वेस्टर मालिक के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से अपने स्तर पर किसानों को पराली जलाने के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन अपनाएं और पराली जलाने से बचें।
बैठक में परियोजना संचालक आत्मा सुश्री रजनी चौहान, सहायक कृषि यंत्री सुश्री कृति पाण्डेय, अनुविभागीय अधिकारी कृषि श्रीमती पूनम यादव, भारतीय किसान यूनियन के जिला सचिव श्री अभिताप कुमार तिवारी, भारतीय किसान संघ के संभाग मंत्री श्री बिहारी लाल निगम सहित किसान प्रतिनिधि श्री सतीश ज्योतिषी, श्री बसंत कुमार मिश्रा, श्री सतीश चौबे, श्री आशीष चौरसिया, श्री रमाकांत चौरसिया एवं श्री कन्छेदी सिंह लोधी उपस्थित रहे।


