कटनी – किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ पारदर्शी एवं सुचारु रूप से उपलब्ध कराने हेतु शासन द्वारा एग्रीस्टैंक योजनांतर्गत फार्मर आईडी (किसान पहचान पत्र) को अनिवार्य किया गया है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर जिले में अभियान चलाकर फार्मर आईडी बनाने का कार्य किया जा रहा है। शासन के नियमों के तहत भू-स्वामियों को फार्मर आईडी बनवाना जरूरी है।
अब प्रदेश के सभी जिलों में ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरण हेतु ‘एग्रीस्टैक’ (किसान रजिस्ट्री) डेटा का उपयोग किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत, प्रदेश के सभी भूधारी किसानों के लिए विशिष्ट ‘फार्मर आईडी’ जनरेट करने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। शासन का मुख्य उद्देश्य किसान रजिस्ट्री में दर्ज किसानों की जानकारी को उनके भू-अभिलेखों से पूर्णतः लिंक करना है। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि सिस्टम में किसान की भूमि संबंधी समस्त जानकारी उपलब्ध रहे, जिसके आधार पर उर्वरक का सटीक और न्यायोचित वितरण किया जा सके।
कलेक्टर श्री तिवारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे सभी भूधारी किसानों की फार्मर आईडी जनरेट करने और उनकी सभी भूमियों को लिंक करने की कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करें। इस डिजिटल एकीकरण से किसानों को खाद प्राप्त करने में होने वाली असुविधाओं का निराकरण होगा और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी। किसान रजिस्ट्री और भू-अभिलेखों की इस मैपिंग से कृषि योजनाओं का लाभ सीधे और सही लाभार्थियों तक पहुँचना संभव हो सकेगा।
फार्मर आईडी नहीं बनवाने से होंगे ये नुकसान
फार्मर आईडी न बनवाने पर किसानों को भविष्य में उर्वरक प्राप्त करने और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा। इसी तरह फसल बीमा योजना, कृषि अनुदान, बीज एवं उर्वरक सब्सिडी से किसान वंचित हो जायेंगे। इसी प्रकार प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, सूखा अथवा ओलावृष्टि की स्थिति में मुआवजा प्राप्त करने में किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) एवं अन्य बैंकिंग सुविधाओं में बाधा होगी और भविष्य में लागू होने वाली किसान हितैषी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।
यहां बनवा सकते हैं फार्मर आईडी
कृषक अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (सीएससी), पंचायत कार्यालय, तहसील कार्यालय और पटवारी से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज (आधार कार्ड, भूमि अभिलेख, मोबाईल आदि) के साथ अपनी फार्मर आईडी बनवा सकते हैं।
कलेक्टर श्री तिवारी ने जिले के सभी कृषकों से शीघ्रातिशीघ्र अपनी फार्मर आईडी अनिवार्य रूप से बनवाने एवं अपनी भूमि का एग्रीस्टैक डाटा (फार्मर रजिस्ट्री) लिंक कराने की अपील की है। जिससे उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी योजनाओं का समय पर लाभ मिल सके और वे जरुरी कृषि संबंधित सेवाओं का उपभोग कर सके। कलेक्टर ने सभी राजस्व अधिकारियों को भी अभियान स्वरूप में फार्मर आईडी बनाने के कार्य को संपादित करने की हिदायत दी है।










