जबलपुर रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से जहाँ मिट्टी की उर्वरता कम होती जा रही है,
तब ऐसी स्थिति में जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम भुवारा के प्रगतिशील किसान केसरी सिंह ठाकुर ने
प्राकृतिक खेती को अपनाकर किसानों को नई राह दिखाई है। श्री ठाकुर ने इस रबी सीजन में दस एकड़
भूमि पर जैविक विधि से गेहूं की एचडी-2851 किस्म की बुवाई की और इससे उन्हें 19 क्विंटल प्रति
एकड़ का शानदार उत्पादन प्राप्त हुआ है।
पिछले करीब दस वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे केसरी सिंह ठाकुर ने अपनी कृषि भूमि के जैविक
प्रमाणिकरण पंजीयन के लिये आवेदन किया है। इसी सिलसिले में जिला जैविक प्रमाणीकरण अधिकारी
एवं अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने उप संचालक कृषि डॉ एस के निगम तथा
विभागीय अधिकारियों के साथ गुरुवार को केसरी सिंह ठाकुर के खेत का निरीक्षण किया। कृषि
अधिकारियों के मुताबिक श्री ठाकुर अपने खेत में बाजार के रसायनों के बजाय स्वयं द्वारा तैयार किये
गये जैव रसायनों का उपयोग कर रहे हैं। इससे जहाँ लागत कम करने में मदद मिली है वहीं उनकी आय
में इजाफा भी हुआ है।
निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन एवं जिला जैविक प्रमाणीकरण निरीक्षक डॉ इंदिरा
त्रिपाठी के नेतृत्व में कृषि अधिकारियों ने कृषक केशरी की भूमि के जैविक प्रमाणीकरण के पंजीयन हेतु
मध्यप्रदेश राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्थान भोपाल को आवेदन प्रेषित करने का निर्णय लिया। जैविक
प्रमाणीकरण अधिकारी डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने बताया कि किसान केसरी सिंह द्वारा प्राकृतिक खेती की
अपनाई गई की पद्धति और घर पर बनाए गए घनजीवामृत जैसे उत्पाद छोटे और सीमांत किसानों के
लिए आत्मनिर्भर बनने का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है।
इस अवसर पर उप संचालक कृषि डॉ एस के निगम ने भी कृषक केसरी सिंह ठाकुर की जैविक खेती
अपनाने के लिये सराहना करने के साथ-साथ उन्हें प्रत्येक गुरुवार एवं रविवार को जबलपुर में लगाये जा
रहे जैविक हाट बाजार में अपने गेहूं के पैकेट बना कर लाने की सलाह भी दी, ताकि उन्हें इस गेहूं का
उचित दाम मिल सके। डॉ निगम ने मौके पर मौजूद आसपास के किसानों को छोटे स्तर पर प्राकृतिक
रूप से मल्टी लेयर फार्मिंग की शुरुआत करने का सुझाव भी दिया।








