जबलपुर,धान की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की स्थिति का जायजा लेने उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास उमेश कटहरे के नेतृत्व में कृषि अधिकारियों ने गत दिवस पनागर विकासखंड के कई ग्रामों का भ्रमण कर किसानों को फसल सुरक्षा के संबंध में आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया। कृषि अधिकारियों ने ग्राम जुनवानी में कृषक सुरेन्द्र नुनिया, ग्राम कालाडूमर में सरपंच प्रदीप पटेल एवं
कृषक रामदास पटेल, ग्राम बम्हनौदा में कृषक भोला पटेल तथा ग्राम उर्दुआ कलां में कृषक जितेन्द्र पटेल के खेत का अवलोकन कर फसल की वर्तमान स्थिति, कीट एवं रोग प्रकोप तथा अपनाए जा रहे फसल प्रबंधन उपायों की जानकारी ली। अवलोकन के दौरान धान की विभिन्न किस्मों में ब्राउन प्लांट हॉपर का प्रकोप पाया गया। इसके साथ ही
कुछ खेतों में अन्य कीट एवं रोगों के लक्षण भी पाए गए। अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि धान के पौधों के निचले हिस्से एवं तने के पास नियमित रूप से निरीक्षण करें तथा कीटों की अधिक होने पर ही अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें।
किसानों को बताया गया कि धान में ब्राउन प्लांट हॉपर की स्थिति में खेत में अनावश्यक रूप से पानी भरा न रखें तथा आवश्यकता होने पर 3-4 दिन के लिए पानी निकालकर खेत को सुखाने की व्यवस्था करें। अत्यधिक नत्रजन के उपयोग, घनी फसल एवं लगातार पानी भरे रहने से इस कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। प्रारंभिक अवस्था में नीम आधारित उत्पाद या नीम तेल जैसे जैविक विकल्पों का उपयोग भी समेकित कीट प्रबंधन के अंतर्गत किया जा सकता है। ब्राऊन प्लांट हार्पर का प्रकोप अधिक होने पर कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार पाइमेट्रोजिन आधारित उत्पाद अथवा अन्य अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग किया जा सकता है। धान के तना छेदक एवं लीफ फोल्डर के नियंत्रण के लिए खेत में नियमित निगरानी, फेरोमोन ट्रैप तथा आवश्यकता के अनुसार जैविक नियंत्रण उपायों को अपनाने की सलाह दी गई। इसी प्रकार धान में ब्लास्ट रोग की रोकथाम के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन, खेत की नियमित निगरानी तथा रोग की प्रारंभिक अवस्था में अनुशंसित फफूंदनाशी का प्रयोग करने की सलाह दी गई। शीथ ब्लाइट की स्थिति में खेत में अत्यधिक नमी एवं घनी फसल से बचने तथा रोग के लक्षण दिखाई देने पर अनुशंसित फफूंदनाशी का उपयोग करने की सलाह दी गई। कृषि अधिकारियों द्वारा कृषकों को यह भी सलाह दी गई कि एक ही रसायन का बार-बार उपयोग न करें, कीटनाशक एवं फफूंदनाशी की अनुशंसित मात्रा का ही प्रयोग करें तथा आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग रसायन समूहों का क्रमवार उपयोग करें। जैविक विकल्पों में नीम आधारित उत्पाद, ट्राइकोडर्मा एवं अन्य अनुशंसित जैव-नियंत्रण एजेंटों को समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन में शामिल किया जा सकता है। कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि फसल में किसी भी कीट अथवा रोग के लक्षण दिखाई देने
पर बिना पहचान के कीटनाशक का प्रयोग न करें, बल्कि संबंधित कृषि अधिकारी से सलाह लेकर ही अनुशंसित दवा एवं मात्रा का प्रयोग करें। धान की फसल के अवलोकन के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पंकज शर्मा, कृषि विस्तार अधिकारी एस जी मनजी भी मौजूद थे।


